हम आ चुके हैं—नेपाल स्कुप (NepalScoop.com) के रूप में।
पत्रकारिता को समाज का दर्पण (आईना) कहा जाता है। लेकिन, यदि आईना ही मैला हो, तो दृश्य कभी स्पष्ट नहीं दिखाई देता। एक गंदा दर्पण वास्तविकता को भी दूषित कर देता है। इसीलिए, हम एक 'साफ़ आईने' के रूप में आपके समक्ष आए हैं। नेपाल स्कुप पर हम समाज को ठीक वैसा ही दिखाएंगे जैसा वह वास्तव में है।
हमारा आधार संतुलन, वस्तुनिष्ठता और यथार्थ है। इसे हम केवल कहेंगे नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में साबित करेंगे। यह हमारा आपसे वादा है।
हमारा मानना है: भले ही हम देर से आएं, लेकिन हम सत्य के साथ आएंगे। पत्रकारिता को अक्सर 'जल्दबाजी का साहित्य' कहा जाता है, लेकिन हमारा मानना है कि पत्रकारिता में गलतियों के लिए कोई स्थान नहीं है। ऑनलाइन पत्रकारिता एक अत्यंत संवेदनशील विधा है। यहाँ प्रकाशित सामग्री पल भर में पूरी दुनिया तक पहुँचती है। यह पढ़ने, देखने और सुनने का एक सशक्त माध्यम है। हम इस अवसर का पूरा सम्मान करेंगे।
हम चुनौतियों के बीच खड़े हैं। ऑनलाइन पत्रकारिता का विस्तार तेजी से हुआ है, लेकिन इसके साथ विकृतियाँ भी बढ़ी हैं। इन सब के बीच नेपाल स्कुप को एक विकार-रहित और विश्वसनीय माध्यम के रूप में स्थापित करना हमारा संकल्प है।
इस संकल्प में आपका सहयोग अनिवार्य है। हमें आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा। अपने पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं को हम शब्दों में नहीं, बल्कि अपने कर्मों में अपनाएंगे।